वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ

वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ

शैलेन्द्र

वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर ! जाएगा कहाँ ?

दम ले ले घड़ी भर, ये छैयाँ पाएगा कहाँ ?

बीत गए दिन प्यार के पल-छिन

सपना बनी वो रातें

भूल गए वो, तू भी भुला दे

प्यार की वो मुलाकातें

हो जाएगा सब दूर अन्धेरा, मुसाफ़िर ! जाएगा कहाँ ?

कोई भी तेरी राह न देखे

नैना बिछाए न कोई

दर्द से तेरे कोई न तड़पा

आँख किसी की न रोई

कहे किसको तू मेरा, मुसाफ़िर ! जाएगा कहाँ ?

कहते हैं ज्ञानी– दुनिया है फ़ानी

पानी पे लिखी लिखाई

है सबकी देखी, है सबकी जानी

हाथ किसी के ना आई

कुछ तेरा न मेरा, मुसाफ़िर ! जाएगा कहाँ ?

0 thoughts on “वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ”

  1. A marvelous song rendered by Great Sachin Dev Barman वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर ! जाएगा कहाँ ? which lead you to a nostalic realm of world.

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