मीराबाई के सुबोध पद

84. राग बिलावल
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लेतां लेतां रामनाम रे, लोकड़ियां तो लाजो मरै छे।
हरि मंदिर जातां पांवड़ियां रे दूखै, फिर आवै आखो गाम रे।
झगड़ो धाय त्यां दौड़ीने जाय रे, मूकीने घर ना काम रे।।
भांड भवैया गणकात्रित करतां वैसी रहे चारे जाम रे।
मीरा ना प्रभु गिरधर नागर चरण कंवल चित हाय रे।।6।।
सब्दार्थ :- लोकड़ियां = लोग। लाजां मरे छे =शर्म के मारे मरते हैं।
पांवड़ियां = पैर। आखो = सारा। धाय =हो रहा हो। त्यां = तहां।
मूकीने =छोड़कर। भवैया = नाचने-वाले। बैसी रहे = बैठा रहता है।
टिप्पणि :- यह पद गुजराती भाषा में रचा गया है।

नाम
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