मीराबाई के सुबोध पद

83. राग बिहागरा
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रमइया बिन यो जिवडो दुख पावै। कहो कुण धीर बंधावै।।
यो संसार कुबुधि को भांडो, साध संगत नहीं भावै।
राम-नाम की निंद्या ठाणै, करम ही करम कुमावै।।
राम-नाम बिन मुकति न पावै, फिर चौरासी जावै।
साध संगत में कबहुं न जावै, मूरख जनम गुमावै।।
मीरा प्रभु गिरधर के सरणै, जीव परमपद पावै।।5।।
शब्दार्थ /अर्थ :- जिवड़ो = जीव। कुबुधि = दुर्बुद्धि। भांडो = बर्तन।
कुमावै = कमाता है। चौरासी = चौरासी लाख योनियां।

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