मीराबाई के सुबोध पद

80. राग रागश्री
…………………….

राम नाम-रस पीजै, मनुआं राम-नाम-रस पीजै।
तज कुसंग सत्संग बैठ नित हरि-चर्चा सुनि लीजै।।
काम क्रोध मद लोभ मोहकूं बहा चित्तसें दीजै।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, ताहिके रंग में भीजे।।2।।
शब्दार्थ /अर्थ :- बहा दीजै = हटा देना चाहिए। रंग में भीजै = प्रेमरस में भीग जाना
चाहिए।

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