मीराबाई के सुबोध पद

64. राग पहाड़ी
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सीसोद्यो रूठ्यो तो म्हांरो कांई कर लेसी।
म्हे तो गुण गोविन्द का गास्यां हो माई।।
राणोजी रूठ्यो वांरो देस रखासी,
हरि रूठ्या किठे जास्यां हो माई।।
लोक लाजकी काण न मानां,
निरभै निसाण घुरास्यां हो माई।।
राम नामकी झाझ चलास्यां,
भौ-सागर तर जास्यां हो माई।।
मीरा सरण सांवल गिरधर की,
चरण कंवल लपटास्यां हो माई।।4।।
शब्दार्थ /अर्थ :- सीसोद्यो =शीशोदिया, आशय है यहां राणा भोजराज से, जो मेवाड़ के
महाराणा सांगा के ज्येष्ठ राजकुमार थे, इन्हीं के साथ मीराबाई का विवाह हुआ था।

रूठ्यौ = रूठ गया। कांई कर लेसी = क्या कर लेगा, म्हे = मैं। गास्यां =गाऊंगी
माई = सखी। किठे = कहां। काण =मर्यादा। निसाण =नगाड़ा। घुरस्यां =बजावेगी।

झाझ =जहाज।

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