मीराबाई के सुबोध पद

60. राग तिलक कामोद
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छोड़ मत जाज्यो जी महाराज।।
मैं अबला बल नायं गुसाईं, तुमही मेरे सिरताज।
मैं गुणहीन गुण नांय गुसाईं, तुम समरथ महाराज।।
थांरी होयके किणरे जाऊं, तुमही हिबडारो साज।
मीरा के प्रभु और न कोई राखो अबके लाज।।7।।
शब्दार्थ /अर्थ :- नांय = नहीं। थांरी =तुम्हारी। किणरे =किसकी। हिबडारो =हृदय के।
निश्चय
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