मीराबाई के सुबोध पद

57. राग हमीर
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हरी मेरे जीवन प्रान अधार।
और आसरो नाहीं तुम बिन तीनूं लोक मंझार।।
आप बिना मोहि कछु न सुहावै निरख्यौ सब संसार।
मीरा कहै मैं दासि रावरी दीज्यो मती बिसार।।4।।
शब्दार्थ /अर्थ :- आसरो = सहारा। मंझार =में। रावरी =तुम्हारी।

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