मीराबाई के सुबोध पद

54. राग सिंध भैरवी
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म्हांरे घर होता जाज्यो राज।
अबके जिन टाला दे जाओ, सिर पर राखूं बिराज।।
म्हे तो जनम जनम की दासी, थे म्हांका सिरताज।
पावणडा म्हांके भलां ही पधार््या, सब ही सुधारण काज।।
म्हे तो बुरी छां थांके भली छै, घणोरी तुम हो एक रसराज।
थांने हम सब ही की चिंता, (तुम) सबके हो गरीबनिवाज।।
सबके मुगट सिरोमणि सिरपर, मानीं पुन्यकी पाज।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, बांह गहेकी लाज।।1।।
शब्दार्थ /अर्थ :- होता जाज्यो =होते हुए जाना। टाला =बहाना। म्हे = मैं। थे =तुम।

म्हाका = मेरा। पावणडा =पाहुना। छां =हूं। घणेरी =बहुत। पाज = पुल,मर्यादा

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