मीराबाई के सुबोध पद

14. राग दरबारी
…………………….

प्रभुजी थे कहां गया नेहड़ो लगाय।
छोड़ गया बिस्वास संगाती प्रेमकी बाती बलाय।।
बिरह समंद में छोड़ गया छो, नेहकी नाव चलाय।
मीरा के प्रभु कब र मिलोगे, तुम बिन रह्यो न जाय।।14।।
शब्दार्थ /अर्थ :- थे =तू। नेहड़ो = प्रेम। बाती बलाय =आग लगाकर।

समंद =समुद्र। छो = हो। कब र = अरे, कब।

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